एक ही आंगन में छह शादियां : जौनसार बावर की “जोजोड़ा” परंपरा बनी मिसाल

विकासनगर: जौनसार बावर की पारंपरिक संस्कृति एक बार फिर चर्चा में है। यहां की अनोखी ‘जोजोड़ा’ विवाह परंपरा ने आधुनिक दौर में भी सामाजिक एकता, सादगी और सामूहिकता की मिसाल पेश की है। खारसी गांव में एक ही परिवार में पांच भाइयों की शादी एक साथ संपन्न हुई, जबकि उसी परिवार की बेटी की भी विदाई हुई, जिससे यह आयोजन और खास बन गया।

सामूहिक विवाह की अनूठी मिसाल

देहरादून जिले के इस जनजातीय क्षेत्र में वर्षों पुरानी परंपरा के तहत एक ही परिवार के कई भाइयों की शादी एक साथ की जाती है। इसका उद्देश्य संयुक्त परिवार को मजबूत करना और शादी में होने वाले फिजूलखर्च को रोकना है। खारसी गांव में 29 अप्रैल को आयोजित इस समारोह में पांच दुल्हनें एक साथ बारात लेकर दूल्हों के घर पहुंचीं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया गया।

‘जोजोड़ा’ परंपरा की खासियत

यहां विवाह की परंपरा देश के अन्य हिस्सों से अलग है। आमतौर पर जहां दूल्हा बारात लेकर दुल्हन के घर जाता है, वहीं जौनसार बावर में दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंचती है। इस परंपरा को ‘जोजोड़ा’ कहा जाता है। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कुल पुरोहित भीम दत्त शर्मा ने सभी जोड़ों का विधि-विधान से विवाह संपन्न कराया।

एक परिवार, छह शादियां

परिवार के मुखिया दौलत सिंह चौहान के अनुसार, तीन भाइयों के पांच बेटों की शादी एक साथ कराई गई, जबकि उनकी बेटी की विदाई भी इसी अवसर पर हुई। उन्होंने बताया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इससे परिवार की एकता बनी रहती है।

सादगी और सामाजिक संदेश

परिवार के बड़े सदस्य खजान सिंह चौहान ने बताया कि इस आयोजन में दिखावे और अनावश्यक खर्च से पूरी तरह बचा गया। शादी में न शराब का इस्तेमाल हुआ और न ही महंगे कपड़ों और गहनों पर जोर दिया गया। उन्होंने समाज से अपील की कि शादी में फिजूलखर्ची के बजाय बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दिया जाए।

खुशियों का माहौल

एक साथ पांच बहुओं के घर आने से परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहा। परिवार की बेटी नीलम चौहान ने इसे गर्व का विषय बताते हुए कहा कि वह भी भविष्य में इसी परंपरा को अपनाना चाहेंगी। समारोह में शामिल लोगों ने भी इस पहल की सराहना की।

संस्कृति और विरासत की पहचान

जौनसार बावर क्षेत्र अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। देहरादून जिले के इस पर्वतीय इलाके में लोग आज भी अपनी पारंपरिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों को जीवित रखे हुए हैं। यहां के लोग महासू देवता मंदिर को अपना आराध्य मानते हैं और खुद को पांडवों का वंशज मानने की मान्यता भी प्रचलित है।

सामाजिक संदेश के साथ परंपरा

खारसी गांव में आयोजित यह सामूहिक विवाह न सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन था, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी देता है, कि सादगी, एकता और परंपराओं के संरक्षण का। आधुनिक दौर में जहां शादियां दिखावे का माध्यम बनती जा रही हैं, वहीं जौनसार बावर की यह परंपरा एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।

 
 

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