मां अनसूया की रथडोली का लक्ष महायज्ञ और देवी भागवत कथा का शुभारंभ

गोपेश्वर (चमोली)। सती शिरोमणि माता अनसूया देवी की देवरा यात्रा के उपलक्ष्य में चमोली जिले के खल्ला गांव में जलकलश यात्रा के साथ लक्ष महायज्ञ और श्रीमद् देवी भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ। धार्मिक परंपराओं और विधि-विधानों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

गोपेश्वर के समीप स्थित खल्ला गांव में माता अनसूया की रथ डोली सात माह की देवरा यात्रा पूर्ण कर रविवार को गांव लौटी। इस अवसर पर अमदार और बालात्रिपुरा सुंदरी मंदिर में माता अनसूया की डोली के साथ कठूड गांव से आई ज्वाल्पा देवी की डोली भी पहुंची। इसके बाद अरणी मंथन की परंपरा निभाई गई, जिससे प्राकृतिक रूप से अग्नि प्रज्वलित हुई। अग्नि प्रज्वलन के साथ ही पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठा। इसके उपरांत भव्य जलकलश यात्रा निकाली गई, जो यज्ञ स्थल पहुंचकर संपन्न हुई। यज्ञ स्थल पर देव डोलियों की स्थापना के साथ लक्ष महायज्ञ और देवी भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। कथा के व्यास पंडित मनोज चमोली को विधिवत गद्दी पर स्थापित किया गया, जबकि यज्ञाचार्य डॉ. चंद्रशेखर तिवारी और पंडित राकेश तिवारी ने धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन किया।

व्यास आचार्य पंडित मनोज चमोली ने कथा के दौरान देवी भागवत के महत्व और श्रवण विधि का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने माता अनसूया को संतानदायिनी और शक्ति स्वरूपा बताते हुए कहा कि खल्ला गांव का धार्मिक महत्व प्राचीन काल से ही रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि 1974 के बाद 51 वर्षों पश्चात माता अनसूया की डोली देवरा यात्रा से सकुशल वापस लौटी है, जो क्षेत्र के लिए सौभाग्य की बात है। महायज्ञ 28 अप्रैल तक चलेगा और पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने माता अनसूया और ज्वाला देवी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की।

कार्यक्रम के दौरान देवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह नेगी और ग्राम समिति अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी ने अधिक से अधिक लोगों से महायज्ञ में शामिल होने की अपील की। उन्होंने ज्वाल्पा देवी की डोली के आगमन को ऐतिहासिक बताया।

इस आयोजन से गांव में विशेष उत्साह का माहौल है। विवाहिता बहनों, प्रवासियों और रिश्तेदारों की बड़ी संख्या में उपस्थिति से पूरा खल्ला गांव भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है।

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