सांस्कृतिक वैभव का संगम : सलुड़ में अंतरराष्ट्रीय ‘रम्माण’ मेले का भव्य समापन

ज्योतिर्मठ। चमोली जनपद के जोशीमठ विकासखंड के सीमांत सलुड़-डुंग्रा गांव में विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर ‘रम्माण’ उत्सव का समापन अत्यंत हर्षोल्लास और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। 14 अप्रैल से 26 अप्रैल तक चले इस 13 दिवसीय ऐतिहासिक मेले में उत्तर और दक्षिण भारत की सांस्कृतिक धाराओं का एक दुर्लभ समन्वय देखने को मिला। डोल-दमाऊ की 18 पारंपरिक तालों पर जब कलाकारों ने पौराणिक प्रसंगों पर आधारित मुखौटा नृत्य प्रस्तुत किया, तो हजारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे। यूनेस्को (UNESCO) द्वारा ‘विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत’ घोषित यह मेला न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा और प्रकृति व मानव के अटूट संबंध का जीवंत प्रमाण भी है।

​इस गौरवशाली अवसर पर मुख्य अतिथि बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला ने मेले की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए इसके सौंदर्यीकरण और विकास हेतु 3 लाख रुपये की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि “उत्तराखंड के मेले हमारी संस्कृति और पहचान के स्तंभ हैं; इन आयोजनों में समाज का अद्भुत मिलन होता है और ग्रामीणों के प्रयासों से इन्हें देखना एक सुखद अनुभव है, इसलिए हमें अपनी विरासत को और अधिक आकर्षक ढंग से संजोना चाहिए।” वहीं, ब्लॉक प्रमुख अनूप नेगी ने भी मेले के लिए ढाई लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान प्रशासनिक और राजनीतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें जिलाधिकारी गौरव कुमार, पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पवार, नगर पालिका अध्यक्ष देवेश्वरी साह, मेला समिति के अध्यक्ष शरत सिंह बंगारी, सचिव विकेश कुंवर, संयोजक कुशाल सिंह भंडारी, कांग्रेस नगर अध्यक्ष प्रकाश नेगी, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष दिगंबर सिंह, और कुशाल सिंह भंडारी (कांग्रेस) शामिल रहे।

​मेले के मुख्य आकर्षण ‘मुखौटा नृत्य’ के दौरान माल्यौण, मोर-मोरियीण, बणिया-बणियाण, माल युद्ध के साथ-साथ भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान के प्रसंगों ने दर्शकों को देवयुग की साक्षात अनुभूति कराई। केवल सलुड़ ही नहीं, बल्कि ज्योतिर्मठ के सेलंग गांव में भी रामायण भ्रमण और मेले का आयोजन पूरे उत्साह के साथ किया गया। क्षेत्र की खुशहाली, बेहतर फसल और दैवीय सुरक्षा के प्रतीक इस मेले के अंतिम दिन प्रवासियों और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे पूरी घाटी ‘जय बद्री विशाल’ के उद्घोष से गुंजायमान रही। स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस अंतरराष्ट्रीय धरोहर को भविष्य में और अधिक भव्य स्वरूप प्रदान करने का सामूहिक आश्वासन दिया।

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