देहरादून स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में अनियमितताओं की पुष्टि : कांग्रेस ने लगाए घोटाले के आरोप, सीबीआई जांच की मांग

देहरादून : देहरादून में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय खामियों की पोल नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में खुल गई है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने आज पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीएजी रिपोर्ट ने कांग्रेस के पुराने आरोपों की पुष्टि कर दी है और यह भाजपा सरकार के संरक्षण में हुआ सबसे बड़ा घोटाला साबित हो रहा है। उन्होंने तत्काल सीबीआई जांच की मांग की है।

धस्माना ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2017 में तीसरे चरण में देहरादून को स्मार्ट सिटी चुनते हुए 2023 तक योजना पूरी करने की मंजूरी दी थी। लेकिन समय पर कार्य न होने पर बार-बार समय विस्तार दिया गया। 2025 में आधे-अधूरे और निम्न स्तर के कार्यों के बावजूद तत्कालीन सीईओ ने प्रोजेक्ट पूर्ण होने की घोषणा कर दी। छह-सात वर्षों में शहर को खोद-खोदकर बिगाड़ा गया, सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर की स्थिति पहले से बदतर हो गई।

सीएजी रिपोर्ट (रिपोर्ट नंबर 5 ऑफ 2025) में प्रमुख अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें शामिल हैं:

बिना टेंडर के 2.93 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए।

समय पर कार्य पूरा न होने पर कार्यदायी संस्थाओं से 19 करोड़ रुपये की वसूली नहीं की गई।

5.91 करोड़ रुपये खर्च कर तीन सरकारी स्कूलों में स्मार्ट सुविधाएं (कंप्यूटर लैब, इंटरेक्टिव बोर्ड, प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, सीसीटीवी, बायोमेट्रिक) लगाई गईं, लेकिन बिजली बिलों के बोझ के कारण इन्हें शुरू नहीं किया गया और वे बेकार पड़ी हैं।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 4.55 करोड़ रुपये का बायोमेट्रिक और सेंसर-आधारित मॉड्यूल मार्च 2022 में तैयार हुआ, लेकिन फरवरी 2025 तक इस्तेमाल नहीं हुआ, जिससे खर्च बेकार साबित हुआ।

ई-रिक्शा और अन्य स्मार्ट वेस्ट वाहनों की खरीद के बाद दो वर्ष तक संचालन नहीं हुआ।

कुल 737 करोड़ रुपये में से 634.11 करोड़ खर्च होने के बावजूद कई प्रोजेक्ट अधूरे या गैर-कार्यात्मक रहे, जैसे केवल 130 स्मार्ट पोल में से 27 ही लगे।

धस्माना ने आरोप लगाया कि भूमिगत विद्युतीकरण, ट्रैफिक सिस्टम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्कूल-कॉलेजों में सीसीटीवी-वाईफाई, स्मार्ट बोर्ड और स्मार्ट शौचालय जैसे कार्यों पर सैकड़ों करोड़ खर्च हुए, लेकिन ज्यादातर दिखावे के लिए निम्न गुणवत्ता के या आधे-अधूरे रहे। कांग्रेस ने कई बार यह मुद्दे उठाए, लेकिन सरकार ने अनसुना किया और घोटाले जारी रहे।

उन्होंने कहा, “यह घोटाला पूरी तरह राज्य सरकार के संरक्षण में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारियों और अध्यक्ष की देखरेख में हुआ। अगर सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो भाजपा सरकार का यह सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा।”

रिपोर्ट विधानसभा में 10 मार्च 2026 को पेश की गई थी, जिसमें 2017-18 से 2022-23 तक की अवधि की समीक्षा की गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और जनता के पैसे की बर्बादी पर रोक लगाई जाए।

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