हर गर्भवती महिला तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी – सचिव स्वास्थ्य सचिन कुर्वे

  • उत्तराखण्ड के अति-दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं से सुरक्षित मातृत्व को नई गति
  • फील्ड से सीधे संवाद के साथ सख्त मॉनिटरिंग, होम डिलीवरी पर पूर्ण रोक के निर्देश

देहरादून : राज्य में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को और सख्त करते हुए गुरुवार को एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में देहरादून और चम्पावत जनपदों की स्वास्थ्य सेवाओं की गहन समीक्षा की गई। बैठक की विशेषता यह रही कि फील्ड स्तर की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए दोनों जनपदों की एएनएम ने सीधे जुड़कर जमीनी चुनौतियों और प्रगति से अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक के दौरान सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने स्पष्ट कहा कि अब स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल प्रक्रिया नहीं बल्कि ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। उन्होंने दोहराया कि अप्रैल माह से राज्य में किसी भी स्तर पर होम डिलीवरी स्वीकार्य नहीं होगी और प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सभी स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है।

EDD आधारित माइक्रो ट्रैकिंग पर जोर

समीक्षा बैठक में निर्देश दिया गया कि प्रत्येक गर्भवती महिला की अपेक्षित प्रसव तिथि (EDD) के आधार पर माइक्रो ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं के बीच दैनिक समन्वय के माध्यम से अंतिम मील तक फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी गर्भवती महिला की देखभाल में कोई कमी न रह जाए। इसके साथ ही चिन्हित होम डिलीवरी पॉकेट्स में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयं फील्ड विजिट कर समाधान आधारित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

अतिदुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग

बैठक में पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित परिवहन की चुनौती पर विशेष चर्चा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि दुर्गम क्षेत्रों में समय से पूर्व योजना बनाकर गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में सड़क संपर्क या समय पर परिवहन संभव नहीं है, वहां हेली सेवाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति में गर्भवती महिला को तत्काल स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाया जा सके।

ANC जांच और हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान पर फोकस

बैठक के दौरान गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच (ANC) को मातृ मृत्यु दर में कमी का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला का प्रथम तिमाही में पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए और न्यूनतम चार ANC जांच अनिवार्य रूप से कराई जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक लैब परीक्षण समय पर किए जाएं और उच्च जोखिम गर्भावस्था (HRP) की समय पर पहचान की जाए। कई क्षेत्रों में HRP की कम पहचान पर चिंता व्यक्त करते हुए सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने इसमें तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

एनीमिया नियंत्रण और सामुदायिक जागरूकता

बैठक में गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की समस्या पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक गर्भवती महिला की नियमित ट्रैकिंग और फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाए। विशेष रूप से गंभीर एनीमिया के मामलों में समयबद्ध उपचार और चिकित्सकीय हस्तक्षेप को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही सामुदायिक स्तर पर व्यवहार परिवर्तन के लिए आशा और एएनएम को “संवाद से समाधान” की रणनीति अपनाने के लिए कहा गया, ताकि परिवारों को संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जा सके।

टीबी उन्मूलन अभियान को भी गति

बैठक में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि 100-दिवसीय टीबी अभियान के अंतर्गत हाई रिस्क क्षेत्रों को प्राथमिकता के साथ कवर किया जाए। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य स्वास्थ्य शिविरों में अधिकतम टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सभी चिकित्सालयों की कुल ओपीडी का न्यूनतम 10 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग के लिए रेफर करने के निर्देश भी दिए गए।

PCPNDT अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई

बैठक में PCPNDT अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया गया। सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जनपद में नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएं और सरकारी तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों का समयबद्ध निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए। अवैध लिंग निर्धारण गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई करते हुए डिकॉय ऑपरेशन और जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।

सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- सचिन कुर्वे

सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य में सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी है। विशेष रूप से दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं, समयबद्ध परिवहन और मजबूत फील्ड मॉनिटरिंग के माध्यम से मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिए कि परिणाम आधारित कार्ययोजना बनाकर उसे तत्काल प्रभाव से लागू करें और किसी भी स्तर पर लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सहायक निदेशक डॉ. अमलेश, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, सहायक निदेशक डॉ. अजय नागरकर, संबंधित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिवेश चौहान एवं डॉ. मनोज शर्मा तथा वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. नितिन अरोड़ा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला देश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत – सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत

Sun Apr 12 , 2026
देहरादून। सांसद हरिद्वार एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने अपने देहरादून स्थित आवास पर ऐतिहासिक Axiom Mission 4 को सफलता के शिखर तक पहुँचाने वाले भारत के गौरव, अशोक चक्र से सम्मानित, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला तथा नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया के निदेशक कर्नल युवराज मलिक का स्वागत एवं […]

You May Like

Breaking News

Share
error: Content is protected !!