रूडकी : रहमतपुर में संघ का पथ संचलन, गणवेशधारी स्वयंसेवकों का फूलवर्षा से स्वागत

रूडकी : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा रहमतपुर में पथ संचलन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान संघ की विचारधारा, कार्यपद्धति और समाज में उसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा रहमतपुर में आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत भव्य पथ संचलन निकाला गया। इस अवसर पर लगभग तीन सौ गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने संघ घोष की ताल के साथ अनुशासित ढंग से गांव में संचलन किया। पथ संचलन के दौरान गांववासियों ने फूलवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और उनके अनुशासन व संगठनात्मक क्षमता की सराहना की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभाग कार्यवाह लोकेन्द्र जी ने कहा कि आत्मविस्मृत, आत्मकेन्द्रित और आत्मशून्य हो चुके हिन्दू समाज को संगठित कर भारत माता को परम वैभव पर पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग सौ वर्ष पूर्व डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा डॉ. हेडगेवार का जन्मदिवस है और संघ को सही मायनों में जानने के लिए शाखा में आना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि शाखा समाज परिवर्तन का आधार है और समाज के सशक्त होने से ही देश का भाग्य उदय होता है। संघ का उद्देश्य स्व के आधार पर संगठित, गुणवान और समरस हिन्दू समाज का निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित संघ आज शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है और देशभर में सेवा के क्षेत्र में लगभग एक लाख तीस हजार सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं।

लोकेन्द्र ने कहा कि शिक्षा, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और विभिन्न अन्य क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए भारत माता की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक कार्य को राष्ट्रभाव से करें। उन्होंने संघ की सौ वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रारंभिक दौर में उपहास और विरोध का सामना करने के बावजूद आज समाज में संघ की व्यापक स्वीकार्यता बढ़ी है। देश में आई विभिन्न आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप और कोरोना महामारी के दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने सेवा कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने बताया कि संघ पर तीन बार प्रतिबंध भी लगाए गए, लेकिन संगठन अपने ध्येय—भारत माता को परम वैभव पर पहुंचाने—के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ता रहा। आज संघ विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन बन चुका है, जो सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वग्राही रूप में कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम में सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्व के बोध जैसे पंच परिवर्तन के विषयों को समाज में व्यवहार में लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इस अवसर पर जिला प्रचारक जितेन्द्र सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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